क्या आप जानते है दुनिया के इकलौते इस श्मशान के बारे में जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती, जानने के लिए आगे पढ़े
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आज हम आपको बताते है कोशी के मणिकर्णिका श्मशान के बारे में मान्यता है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधा मोक्ष मिलता है. दुनिया का ये इकलौता मणिकर्णिका श्मशान जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती. यहाँ लाशो का आना आना और चिता का जलना कभी नहीं थमता. इस मणिकर्णिका श्मशान पर एक दिन में 300 शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है.

बहुत से लोग भारत की इस प्राचीन परंपरा से अनभिज्ञ हैं लेकिन ये सच है कि सदियों से बनारस के इस श्मशान घाट पर चैत्र माह में आने वाले नवरात्रों की सप्तमी की रात पैरों में घुंघरू बाँधी हुई वेश्याओं का जमावड़ा लगता है एक तरफ जलती चिता के शोले आसमान में उड़ते है तो दूसरी ओर घुंघरू और तबले की आवाज पर नाचती वेश्याएं दिखाई देती हैं.

मौत के मातम के बीच श्मशान महोत्सव का रंग बदल देते हैं तबले की आवाज, घुंघरुओं का संगीत, और मदमस्त नाचती नगरवधुएं. जो व्यक्ति इस प्रथा से अनजान होगा उसके लिए यह मंजर बेहद हैरानी भरा हो सकता है कि रात के समय श्मशान भूमि पर इस जश्न का क्या औचित्य है?

भगवान भोलेनाथ को समर्पित, काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। यही वजह है कि वेश्याएं भी यहां नाच-नाचकर भोलेनाथ से यह प्रार्थना करती हैं कि उन्हें इस तुच्छ जीवन से मुक्ति मिले और अगले जन्म में वे भी समाज में सिर उठाकर जी सके.

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